सत्ता के नशे में भगवान शिव का मठ छोड़कर चला गया ढोंगी आदित्यनाथ
सत्ता एक ऐसी नशे है एक ऐसा अफीम होता है जिसे कोई एक बार चख ले तो उस नशे के बिना नहीं रह सकता यह जब नशा सा किसी पर चढ़ता है हेतु वह भगवान को भी भूल जाता है
और खुद को भगवान समझने लगता है यही हाल योगी ढोंगी आदित्यनाथ का हुआ जिस मठ की सेवा करने के लिए कई पुजारी दिन रात लगे रहते हैं जिस मठ का उत्तराधिकारी बनने के लिए कई लोगों ने अपनी जीवन खफा दी मगर भोले बाबा शिव शंकर किसी एक को ही चुनते हैं अपनी सेवा के लिए उसको ही शक्ति देते हैं मगर वह नहीं जानते थे कि वह अपनी सेवा के लिए एक ढोंगी को चुन रहे है।
और जो सत्ता के नशे में चूर होकर भगवान की भक्ति भूल जाएगा और किसी नेता का प्रचार पार्टी का प्रचार करेगा भोले बाबा का प्रकोप बरसा
जो कई सालों तक नहीं हुआ वह अब हुआ सत्ता एक ऐसी नशा है जिसमें आदमी भगवान तक को भूल जाता है और यही हुआ ढोंगी आदित्यनाथ जहां से शक्ति प्राप्त करता है
उसी मठ को छोड़कर वह सत्ता के नशे में सत्ता के गलियारों में पहुंच गया और उसका हाल यही हुआ कि भोले बाबा उसे अपने मठ से बाहर निकाल दिया
और उस ढोंगी आदित्यनाथ को उस की सजा दी अगर कोई बाबा या योगी धर्म का प्रचार ना कर के किसी एक पार्टी प्रचार करता है
तो ढोंगी बन जाता है और जन की सेवा ना करता हो बस एक जाति विशेष जिसे वह अपना धर्म समझता है तो वह ढोंगी बन जाता है ढोंगी किसी का नहीं होता भगवान को वह अपने हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है
ढोंगियों का यही हाल होता है होता रहेगा जो ढोंगी धर्म का चोला ओढ़कर धर्म का प्रचार ना करें सिर्फ नफरत फैला है और एक पार्टी एक झंडे का प्रचार करे यह ढोंगियों की निशानी है
भगवान शिव ने बहुत अच्छा किया जो एक ढोंगी को अपने मठ से निकाल दिया
जय भोलेनाथ
जय शिव शंकर
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